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Hypothesis या परिकल्पना क्या है? प्रकृति, स्रोत, विशेषताएं, प्रकार व कार्य 

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परिकल्पना शब्द परि + कल्पना दो शब्दों से मिलकर बना है। परि का अर्थ चारो ओर तथा कल्पना का अर्थ चिन्तन है। इस प्रकार परिकल्पना से तात्पर्य किसी समस्या से सम्बन्धित समस्त सम्भावित समाधान पर विचार करना है। परिकल्पना (Hypothesis) किसी भी अनुसन्धान प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण स्तम्भ है।

परिकल्पना क्या है? (What is Hypothesis)

इसका तात्पर्य यह है कि किसी समस्या के विश्लेषण और परिभाशीकरण के पश्चात उसमें कारणों तथा कार्य कारण सम्बन्ध में पूर्व चिन्तन कर लिया गया है, अर्थात् अमुक समस्या का यह कारण हो सकता है, यह निश्चित करने के पष्चात उसका परीक्षण प्रारम्भ हो जाता है। अनुसंधान कार्य परिकल्पना के निर्माण और उसके परीक्षण के बीच की प्रक्रिया है। परिकल्पना के निर्माण के बिना न तो कोई प्रयोग हो सकता है और न कोई वैज्ञानिक विधि के अनुसन्धान ही सम्भव है। वास्तव में परिकल्पना के अभाव में अनुसंधान कार्य एक उद्देश्यहीन क्रिया है। 

परिकल्पना की परिभाषा (Definition of Hypothesis)

परिकल्पना की परिभाषा से समझने के लिए कुछ विद्वानों की परिभाषाओं केा समझना आवश्यक है। जो है –

करलिंगर (Kerlinger) –  ‘‘परिकल्पना केा दो या दो से अधिक चरों के मध्य सम्बन्धों का कथन मानते हैं। ’’ 

मोले (George G. Mouley ) –  ‘‘परिकल्पना एक धारणा अथवा तर्कवाक्य है जिसकी स्थिरता की परीक्षा उसकी अनुरूपता, उपयोग, अनुभव-जन्य प्रमाण तथा पूर्व ज्ञान के आधार पर करना है। ’’ 

गुड तथा हैट (Good & Hatt ) –  ‘‘परिकल्पना इस बात का वर्णन करती है कि हम क्या देखना चाहते है। परिकल्पना भविश्य की ओर देखती है। यह एक तर्कपूर्ण कथन है जिसकी वैद्यता की परीक्षा की जा सकती है। यह सही भी सिद्ध हो सकती है, और गलत भी।

लुण्डबर्ग (Lundberg ) –  ‘‘परिकल्पना एक प्रयोग सम्बन्धी सामान्यीकरण है जिसकी वैधता की जॉच हेाती है। अपने मूलरूप में परिकल्पना एक अनुमान अथवा काल्पनिक विचार हो सकता है जो आगे के अनुसंधान के लिये आधार बनता है। ’’ 

मैकगुइन (Mc Guigan ) –  ‘‘परिकल्पना दो या अधिक चरों के कार्यक्षम सम्बन्धों का परीक्षण योग्य कथन है।

परिकल्पना की प्रकृति (Nature of Hypothesis)

किसी भी परिकल्पना की प्रकृति रूप में हो सकती है –

  • यह परीक्षण के योग्य होनी चाहिये।
  • इसह शोध को सामान्य से विशिष्ट एवं विस्तृत से सीमित की ओर केन्द्रित करना चाहिए।
  • इससे शोध प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर मिलना चाहिए।
  • यह सत्याभासी एवं तर्कयुक्त होनी चाहिए।
  • यह प्रकृति के ज्ञात नियमों के प्रतिकूल नहीं होनी चाहिए।

परिकल्पना के स्रोत (Source of Hypothesis)

1. समस्या से सम्बन्धित साहित्य का अध्ययन

समस्या से सम्बन्धित साहित्य का अध्ययन करके उपयुक्त परिकल्पना का निर्माण किया जा सकता है।

2. विज्ञान

विज्ञान से प्रतिपादित सिद्धान्त परिकल्पनाओं को जन्म देते हैं।

3. संस्कृति  

संस्कृति परिकल्पना की जननी हो सकती है। प्रत्येक समाज में विभिन्न प्रकार की संस्कृति होती है। प्रत्येक संस्कृति सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों में एक दूसरे से भिन्न होती है ये भिन्नता का आधार अनेक समस्याओं को जन्म देता है और जब इन समस्याओं से सम्बन्धित चिंतन किया जाता है तो परिकल्पनाओं का जन्म होता है।

4. व्यक्तिगत अनुभव  

व्यक्तिगत अनुभव भी परिकल्पना का आधार हेाता है, किन्तु नये अनुसंध् ाानकर्ता के लिये इसमें कठिनाई है। किसी भी क्षेत्र में जिनका अनुभव जितना ही सम्पन्न होता है, उन्हें समस्या के ढूँढ़ने तथा परिकल्पना बनाने में उतनी ही सरलता होती है।

5. रचनात्मक चिंतन

यह परिकल्पना के निर्माण का बहुत बड़ा आधार है। मुनरो ने इस पर विशेष बल दिया है। उन्होने इसके चार पद बताये हैं – (i) तैयारी (ii) विकास (iii) प्रेरणा और (iv) परीक्षण। अर्थात किसी विचार के आने पर उसका विकास किया, उस पर कार्य करने की प्रेरणा मिली, परिकल्पना निर्माण और परीक्षण किया।

6. अनुभवी व्यक्तियों से परिचर्चा

अनुभवी एवं विषय विशेषज्ञों से परिचर्चा एवं मार्गदर्शन प्राप्त कर उपयुक्त परिकल्पना का निर्माण किया जा सकता है।

7. पूर्व में हुए अनुसंधान

सम्बन्धित क्षेत्र के पूर्व अनुसंधानों के अवलोकन से ज्ञात होता है कि किस प्रकार की परिकल्पना पर कार्य किया गया है। उसी आधार पर नयी परिकल्पना का सर्जन किया जा सकता है।

उत्तम परिकल्पना की विशेषताएं या कसौटी (Characteristics of a good Hypothesis)

1. परिकल्पना जाँचनीय हो

एक अच्छी परिकल्पना की पहचान यह है कि उसका प्रतिपादन इस ढ़ंग से किया जाये कि उसकी जाँच करने के बाद यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि परिकल्पना सही है या गलत । इसके लिये यह आवश्यक है कि परिकल्पना की अभिव्यक्ति विस्तश्त ढ़ंग से न करके विषिश्ट ढ़ंग से की जाये। अत: जॉँचनीय परिकल्पना वह परिकल्पना है जिसे विष्वास के साथ कहा जाय कि वह सही है या गलत।

2. परिकल्पना मितव्ययी हो

परिकल्पना की मितव्ययिता से तात्पर्य उसके ऐसे स्वरूप से है जिसकी जाँच करने में समय, श्रम एवं धन कम से कम खर्च हो और सुविधा अधिक प्राप्त हो।

3. परिकल्पना को क्षेत्र के मौजूदा सिद्धान्तों तथा तथ्यों से सम्बन्धित होना चाहिए

कुछ परिकल्पना ऐसी होती है जिनमें शोध समस्या का उत्तर तभी मिल पाता है जब अन्य कई उप कल्पनायें (Sub-hypothesis) तैयार कर ली जाये। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि उनमें तार्किक पूर्णता तथा व्यापकता के आधार के अभाव होते हैं जिसके कारण वे स्वयं कुछ नयी समस्याओं केा जन्म दे देते हैं और उनके लिये उपकल्पनायें तथा तदर्थ पूर्वकल्पनायें (adhoc assumptions) तैयार कर लिया जाना आवश्यक हो जाता है।

4. परिकल्पना को किसी न किसी सिद्धान्त अथवा तथ्य अथवा अनुभव पर आधारित होना चाहिये

परिकल्पना कपोल कल्पित अथवा केवल रोचक न हो। अर्थात् परिकल्पना ऐसी बातों पर आधारित न हो जिनका केाई सैद्धान्तिक आधार न हो। जैसे – काले रंग के लोग गोरे रंग के लोगों की अपेक्षा अधिक विनम्र होते हैं। इस प्रकार की परिकल्पना आधारहीन परिकल्पना है क्योंकि यह किसी सिद्धान्त या मॉडल पर आधारित नहीं है।

5. परिकल्पना द्वारा अधिक से अधिक सामान्यीकरण किया जा सके

परिकल्पना का अधिक से अधिक सामान्यीकरण तभी सम्भव है जब परिकल्पना न तेा बहुत व्यापक हो और न ही बहुत विषिश्ट हो किसी भी अच्छी परिकल्पना को संकीर्ण ;दंततवूद्ध होना चाहिये ताकि उसके द्वारा किया गया सामान्यीकरण उचित एवं उपयोगी हो।

6. परिकल्पना को संप्रत्यात्मक रूप से स्पष्ट होना चाहिए

संप्रत्यात्मक रूप से स्पष्ट होने का अर्थ है परिकल्पना व्यवहारिक एवं वस्तुनिश्ठ ढ़ंग से परिभाशित हो तथा उसके अर्थ से अधिकतर लोग सहमत हों। ऐसा न हो कि परिभाषा सिर्फ व्यक्ति की व्यक्गित सोच की उपज हो तथा जिसका अर्थ सिर्फ वही समझता हो। इस प्रकार हम पाते हैं कि शोध मनोवैज्ञानिक ने शोध परिकल्पना की कुछ ऐसी कसौटियों या विशेषताओं का वर्णन किया हैे जिसके आधार पर एक अच्छी शोध परिकल्पना की पहचान की जा सकती है।

परिकल्पना के प्रकार (Types of Hypothesis)

मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्र तथा शिक्षा के क्षेत्र में शोधकर्ताओं द्वारा बनायी गयी परिकल्पनाओं के स्वरूप पर यदि ध्यान दिया जाय तो यह स्पष्ट हो जायेगा कि उसे कई प्रकारों में बाँटा जा सकता है। शोध विशेषज्ञों ने परिकल्पना का वर्गीकरण तीन आधारों पर किया है –

चरों की सख्या के आधार पर

1. साधारण परिकल्पना

साधारण परिकल्पना से तात्पर्य उस परिकल्पना से है जिसमें चरों की संख्या मात्र दो होती है और इन्ही दो चरों के बीच के सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है। उदाहरण स्वरूप बच्चों के सीखने में पुरस्कार का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यहाँ सीखना तथा पुरस्कार दो चर है जिनके बीच एक विशेष सम्बन्ध की चर्चा की है। इस प्रकार परिकल्पना साधारण परिकल्पना कहलाती है।

2. जटिल परिकल्पना

जटिल परिकल्पना से तात्पर्य उस परिकल्पना से हेै जिसमें दो से अधिक चरों के बीच आपसी सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है। जैसे- अंग्रेजी माध्यम के निम्न उपलब्धि के विद्यार्थियों का व्यक्तित्व हिन्दी माध्यम के उच्च उपलब्धि के विद्यार्थियों की अपेक्षा अधिक परिपक्व होता है। इस परिकल्पना में हिन्दी अंग्रेजी माध्यम, निम्न उच्च उपलब्धि स्तर एवं व्यक्तित्व तीन प्रकार के चर सम्मिलित हैं अत: यह एक जटिल परिकल्पना का उदाहरण है।

चरों की विशेष सम्बन्ध के आधार पर 

मैक्ग्यूगन ने (Mc. Guigan, 1990) ने इस कसौटी के आधार पर परिकल्पना के मुख्य दो प्रकार बताये हैं-

1. सार्वत्रिक या सार्वभौमिक परिकल्पना

सार्वत्रिक परिकल्पना से स्वयम् स्पष्ट होता है कि ऐसी परिकल्पना जो हर क्षेत्र और समय में समान रूप से व्याप्त हो अर्थात् परिकल्पना का स्वरूप ऐसा हेा जो निहित चरों के सभी तरह के मानों के बीच के सम्बन्ध को हर परिस्थित में हर समय बनाये रखे। उदाहरण स्वरूप- पुरस्कार देने से सीखने की प्रक्रिया में तेजी आती है। यह एक ऐसी परिकल्पना हे जिसमें बताया गया सम्बन्ध अधिकांष परिस्थितियों में लागू होता है।

2. अस्तित्वात्मक परिकल्पना

इस प्रकार की परिकल्पना यदि सभी व्यक्तियों या परिस्थितियों के लिये नही तो कम से कम एक व्यक्ति या परिस्थिति के लिये नििष्च्त रूप से सही होती है। जैसे – सीखने की प्रक्रिया में कक्षा में कम से कम एक बालक ऐसा है पुरस्कार की बजाय दण्ड से सीखता है’ इस प्रकार की परिकल्पना अस्तित्वात्मक परिकल्पना है।

विशिष्ट उद्देश्य के आधार पर

विशिष्ट उद्देश्य के आधार पर परिकल्पना के तीन प्रकार है-

1. शोध परिकल्पना

इसे कायर्रूप परिकल्पना या कायार्त्मक परिकल्पना भी कहते हैं। ये परिकल्पना किसी न किसी सिद्धान्त पर आधारित या प्रेरित होती है। शोधकर्ता इस परिकल्पना की उद्घोशणा बहुत ही विष्वास के साथ करता है तथा उसकी यह अभिलाशा होती है कि उसकी यह परिकल्पना सत्य सिद्ध हो।

2. शून्य परिकल्पना

शून्य परिकल्पना शोध परिकल्पना के ठीक विपरीत होती है। इस परिकल्पना के माध्यम से हम चरों के बीच कोई अन्तर नहीं होने के संबंध का उल्लेख करते हैं।

3. सांख्यिकीय परिकल्पना 

जब शोध परिकल्पना या शून्य परिकल्पना का सांख्यिकीय पदों में अभिव्यक्त किया जाता है तो इस प्रकार की परिकल्पना सांख्यिकीय परिकल्पना कहलाती है। शोध परिकल्पना अथवा सांख्यिकीय परिकल्पना को सांख्यिकीय पदों में व्यक्त करने के लिये विशेष संकेतों का प्रयोग किया जाता है। शोध परिकल्पना के लिये H1 तथा शून्य परिकल्पना के लिये H0 का प्रयोग हेाता है तथा माध्य के लिये X का प्रयोग किया जाता है।  

परिकल्पना के कार्य (Works of Hypothesis)

1. दिशा निर्देश देना

परिकल्पना अनुसंधानकता को निर्देषित करती है। इससे यह ज्ञात होता है कि अनुसन्धान कार्य में कौन कौन सी क्रियायें करती हैं एवं कैसे करनी है। अत: परिकल्पना के उचित निर्माण से कार्य की स्पष्ट दिशा निश्चित हो जाती है।

2. प्र्रमुख तथ्यों का चुुनाव करना

परिकल्पना समस्या को सीमित करती है तथा महत्वपूर्ण तथ्यों के चुनाव में सहायता करती है। किसी भी क्षेत्र में कई प्रकार की समस्यायें हो सकती है लेकिन हमें अपने अध्ययन में उन समस्याओं में से किन पर अध्ययन करना है उनका चुनाव और सीमांकन परिकल्पना के माध्यम से ही होता है।

3. पुनरावृत्ति को सम्भव बनाना

पुनरावृत्ति अथवा पुन: परीक्षण द्वारा अनुसन्धान के निष्कर्ष की सत्यता का मूल्यांकन किया जाता है। परिकल्पना के अभाव में यह पुन: परीक्षण असम्भव होगा क्यों कि यह ज्ञात ही नही किया जा सकेगा किस विशेष पक्ष पर कार्य किया गया है तथा किसका नियंत्रण करके किसका अवलेाकन किया गया है।

4. निष्कर्ष निकालने एवं नये सिद्धान्तों के प्रतिपादन करना

परिकल्पना अनुसंधानकर्ता केा एक निश्चित निष्कर्ष तक पहुंचने में सहायता करती है तथा जब कभी कभी मनोवैज्ञानिकों को यह विश्वास के साथ पता होता है कि अमुक घटना के पीछे क्या कारा है तो वह किसी सिद्धान्त की पश्श्ठभूमि की प्रतीक्षा किये बिना परिकल्पना बनाकर जॉच लेते हैं। परिकल्पना सत्य होने पर फिर वे अपनी पूर्वकल्पनाओं, परिभाषाओं और सम्प्रत्ययों को तार्किक तंत्र में बांधकर एक नये सिद्धान्त का प्रतिपादन कर देते है।

निष्कर्ष

अत: उपरेाक्त वर्णन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि परिकल्पना किसी भी समस्या के लिये सुझाया गया वह उत्तर है जिसकी तर्कपूर्ण वैधता की जॉच की जा सकती है। यह दो या अधिक चरों के बीच किस प्रकार का सम्बन्ध है ये इंगित करता है तथा ये अनुसन्धान के विकास का उद्देश्यपूर्ण आधार भी है।

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You can extend MATLAB with thousands of packages and toolboxes shared on GitHub, MATLAB File Exchange, and elsewhere.  And MATLAB code and algorithms can be deployed to run on cloud and enterprise systems, used directly in Simulink ® , or automatically converted to C/C++, HDL, and CUDA code to run on embedded devices.

Published: 25 Sep 2020

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namaste ka matlab aur arth hindi me

Namaste ka matlab – नमस्ते का मतलब हिंदी में क्या होता है ? जानिए

नमस्ते मेरे ओर से उन सभी लोगों को है जो मेरे इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं और आपका स्वागत करता हूँ जो कि आप इस खूबसूरत शब्द नमस्ते के अर्थ, नमस्ते का मतलब और इसके भारतीय संस्कृति में गहरे महत्व को जानेगे।

देखें - Important विषय सूची

नमस्ते का अर्थ और सांस्कृतिक अर्थ/महत्व को जाने

नमस्ते का अर्थ /महत्व.

नमस्ते केवल एक शब्द नहीं है नमस्ते का एक महत्व है यह एक इशारा है, एक अभिवादन है और एक संस्कृति की गहरी परंपराओं और सम्मान का प्रतीक है ।

नमस्ते छाती या माथे से

नमस्ते के शब्द के साथ एक पारंपरिक इशारा कहा जा सकता है, जिसमें छाती या माथे के सामने अपने हाथों को दबाने के बाद नमस्ते या प्रणाम अथवा प्रथान कर रहा होता है।

नमस्ते यह दिखाता है कि दो आत्माएं , दो मन, और दो दिल एक दिव्यता की समय में समर्पण और एकता में एक साथ हैं।

नमस्ते का सांस्कृतिक अर्थ /महत्व

यह आदर और विनम्रता का तरीका है। जब कोई “नमस्ते” कहता है, तो वे बस हैलो नहीं कह रहे होते हैं – वे आपके अंदर की आदर और विनम्रता दे रहे होते हैं।

आइए शब्द नमस्ते को तोड़ कर जानने का प्रयास करते हैं

नमस्ते शब्द नम + आस्ते के जोड़ से बना एक हिंदी के शब्द है जब आप नमस्ते कहते हैं तो आप आमतौर पर कह रहे होते हैं जब आप अपने अंदर के सम्मान को व्यक्त करते या मैं आपके भीतर की दिव्यता का सम्मान करता हूं।

नम (नम) का मतलब झुकना या आदर है, जिससे इसे सम्मान बनाता है।

स्ते (आस्ते) संस्कृत शब्द अस से आया हुआ शब्द है, जिसका मतलब है होना । यह यह सूचित करता है कि बोलने वाला और सुनने वाला आत्मा, मन, और दिल एक हैं और मिले हुए हैं।

नम + आस्ते = नमस्ते

namaste ka matlab kya hai arth 2

नमस्ते का मतलब – Namaste Ka Matlab Kya Hai

namaste ka matlab

नम (नम) का मतलब सम्मान है। और स्ते (अस्ते) होना का मतलब है। जब हम नमस्ते कहते हैं तो इसका मतलब होता है कह रहे हैं मैं आपके सम्मान और आदर को समर्पित करता हूं।

नमस्ते का मतलब सीधे – सीधे कहे तो सम्मान और आदर है।

नमस्ते एक साधारण सा कहने का तरीका ही केवल नहीं है। यह एक गहराई और सम्मानजनक मतलब वाला विशेष शब्द है।

जब कोई नमस्ते कहता है, तो वे सम्मान दिखा रहे होते हैं और आपको वह काफी रिस्पेक्ट कर रहा है । ऐसा आप मान के चलिए। ये मुझे कहने में कोइ आपत्ति नहीं है गहराई से सम्मान दे रहा होगा।

नमस्कार का उदाहरण क्या है?

namaste ka udahran handfold india me

नमस्कार का उदाहरण- कई जब लोग नमस्ते कहते हैं तो वे अक्सर अपने हाथों को छाती के सामने लाते हैं और थोड़ी सी झुकर एक खास तरीका से सम्मान और मित्रता दिखाने के लिए उपयोग करते है । यह ऐसे कहने की तरह है मित्रपूर्ण और सम्मान सा लगता होता है

नमस्ते कहने का मतलब क्या होता है – Namaste ka matlab kya hota hai

जब आप नमस्ते सुनते या कहते हैं तो इसका मतलब है कि यह सिर्फ अभिवादन नहीं है बल्कि आप दूसरों की परवाह करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। यह लोगों से जुड़ने और दोस्त बनाने का एक खूबसूरत तरीका है।

नमस्ते और नमस्कार के बीच अंतर क्या है?

हेलो और नमस्ते दो अलग-अलग शब्द हैं और इनमें अंतर होता है

हेलो सामान्य और आमतौर पर उपयोग होने वाला नमस्कार शब्द है जबकि नमस्ते एक गहरे सम्मान और आदर के साथ आपके साथ संस्कृति, दिव्यता का समर्थन करने का एक विशेष तरीका है।

हेलो (Hello) – यह एक नॉर्मल सा अंग्रेजी का नमस्कार शब्द है, और यह विशेष अर्थ तो नहीं पर हेलो केवल एक सामान्य तरीके से दूसरे व्यक्तिगत नमस्कार करने के रूप में प्रयोग होता है और आमतौर पर किसी से मिलते समय उपयोग होता है।

नमस्ते (Namaste) – यह एक हिंदी में उपयोग किये जाने वाला एक शब्द है जिसका हिन्दी और भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। नमस्ते का अर्थ होता है दिव्यता का समर्पण या समर्थन।

इसे एक गहरे सम्मान व्यक्त करने का तरीका माना जाता है और जब कोई नमस्ते कहता है, तो वे आपके साथ साझा भावना ।

FAQ – Namaste ka

नमस्ते का जवाब क्या देना चाहिए.

नमस्ते का उत्तर में नमस्ते या नमस्कार या आशीर्वाद कह सकते है जब नमस्ते का उत्तर देते हैं तो आपके जवाब में मुस्कान और आदर भरा होना चाहिए और आपकी भावनाओं में सादगी और नम्रता होनी चाहिए।

भारत में नमस्ते कितने प्रकार के होते हैं?

भारत में नमस्ते का कुछ कॉमन तरीको के बात करे तो सामान्य नमस्ते, आदरपूर्ण नमस्ते, स्कूली नमस्ते, वैधिक नमस्ते – थोड़ा झुकते हैं साथ ही “नमस्ते” कहते हैं। नमस्ते सर एयर मैडम कहते हैं, और शिक्षकों का सम्मान देते हैं।और गहरे सम्मान और आदर के साथ किया जाता है। जैसे कि गुरु पूर्णिमा या पूजा के टाइम में ।

मुझे आशा है कि आपको नमस्ते के बारे में सीखने में मजा आया होगा । दूसरों के प्रति दयालु और सम्मानपूर्ण वन्य रहें। आज मेरे साथ जुड़ने के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्ते का शाब्दिक अर्थ क्या होता है- प्रणाम। नमस्ते का मतलब आसान वर्ड में ये होता है अगर आप इसको और भी डेटल में जानना चाहते है तो आप इस विकिपीडिया में जाकर पढ़ सकते है

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नमस्कार ! हिंदी ई-गाइड ब्लॉग पर आप शिक्षा, इंटरनेट, टेक्नोलॉजी, क्या और कैसे से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारीयाँ जानने और सीख के लिए है, उम्मीद करता हूँ आप कम शब्दों में सरलता से समझ पाएंगे । …

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1k means in hindi – ‘1K’ & ‘1M’ क्या और कितना होता है?

Posted By: Mangal Gupta Last Updated: Mar 21, 2021

1k means in hindi & 1 million means in hindi – आपने अक्सर youtube, facebook या instagarm के videos या images पर 1k, 5k, 50k, 100k या 1M, 5M, 50M, 100M लिखा हुवा देखा होगा। ऐसे में आपके दिमाग में यह जरुर आता होगा की 1k का मतलब क्या होता है? 1M का मतलब क्या होता है?

अगर आप भी यह जानना चाहते है की 1k, 10k या 1M का मतलब क्या होता है? तो आप बिलकुल सही जगह पर हैं। क्यों की आज के इस पोस्ट में हमलोग जानेगे की 1k kitna hota hai? 1M kitna hota hai?

अगर आप facebook या youtube का इस्तमाल करते हैं। तो आप उनके photos और videos पर 1k like, 1M views या youtube channel पर 1M, 2M subscribers लिखा हुवा जरुर देखा होगा। दरासल इससे यह पता चलता है की उस photos या वीडियोस को कितने लोगो ने देखा हैं।

जैसा की हम किसी चीज़ को shortcut में बताना ज्यादा पसंद करते हैं। ठीक उसी तरह 1K और 1M भी एक short form हैं। चलिए K और M का Meaning Hindi में क्या होता है? जान लेते हैं। 1k means in hindi और 1k followers means in hindi में क्या हैं?

Table of Contents

1k means in hindi

1k means in hindi

अगर आपको 1k kitna hota hai जानना हैं। तो सबसे पहले आपको K symbol का meaning जानना होगा।

वैसे तो K symbol के काफी सारे meaning होते हैं। जैसे की,

  • K means in Chemistry – Chemistry में K का अर्थ Potassium होता हैं।
  • K means in Physics – Physics में K का अर्थ Kelvin होता हैं।

वही math में K का मतलब ‘Kilo’ होता हैं। जिसमे total 1000 units होते हैं। इस तरह maths में 1K का मतलब 1 Kilo यानि 1000 units हुवा।

  • 1 Kilograms = 1 Thousand Grams
  • 1 Kilometer = 1 Thousand Meter

लेकिन इस पोस्ट में हमलोग social media जैसे की YouTube, Facebook, Instagram, Twitter पर इस्तमाल होने वाले K का जिक्र कर रहे हैं। यहाँ 1000 लिखने की जगह 1K लिखा जाता हैं।

अगर आप YouTube या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कही भी ‘1K’ देखते हैं। तो समझ लीजिए वह 1 हज़ार Views, Likes, Subscribers या comments हैं।

कुछ common K’s के उदाहरण निम्न हैं-

  • 1K means – 1000 (एक हजार)
  • 10K means – 10,000 (दस हजार)
  • 100k means – 100,000 (एक लाख)
  • 780K = 980,000 (सात लाख अस्सी हजार)

अब आप समझ गए होगे की numbers के पीछे K लिखने का क्या मतलब होता हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दू की फ्रांस के वैज्ञानिकों ने हजार वाली इकाई के लिए K नाम दिया हैं। तो वही Kilo शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के Khilioi से हुई थी।

  • फ़ोन पर आवाज बदलकर कॉल कैसे करें?

1M Meaning in Hindi

अब आपको idea मिल गया होगा की 1m का full form क्या होगा। जी हां आप सही समझ रहे हैं। M means ‘Million’ होता हैं। मिलियन के लिए M का इस्तेमाल किया जाता हैं।

M – Million

Million एक unit हैं। जिसका अर्थ दस लाख (10,00,000) होता हैं।

इस तरह अगर आप किसी के YouTube channel या Facebook Page पर 1M लिखा हुवा देखते हैं। तो आप समझ लीजिए की उनके channel या page पर 1 Million (1000000) subscribers हैं। यानि की 10 लाख लोगों ने उन्हें subscribe या फॉलो कर रखा हैं।

कुछ common M’s के उदाहरण निम्न हैं-

  • 1M means – 10 लाख
  • 10M means – 1 करोड़
  • 100M means – 10 करोड़
  • 750M means – 75 करोड़

अब आपको 1k means in hindi, 1 million means या 1k followers means का मतलब समझ में आ गया होगा। चलिए अब 1B ka matlab kya hota hai जान लेते हैं।

1B Means In Hindi

1B ka matlab 100 करोड़ यानी 1 अरब (1,000,000,000) होता हैं। 1 अरब को दरसाने के लिए 1B (Billion) लिखा जाता हैं। Youtube पर बहुत ही कम ऐसे में वीडियोस या channel हैं। जिन्होंने 1b यानी 1 billion को छूने में सफ़लता हासिल की हैं।

1B के कुछ उदाहरण निम्न हैं-

  • 1B means – 1,000,000,000 ( 1 अरब )
  • 10B means – 1,000,000,0000 ( 10 अरब )

1K और 1M की Value Social Media पर कितनी है?

किसी भी social media platform पर अगर आपको 1K या 1M लिखा हुवा दिख जाए। तो उम्मीद करते है उन्हें देखने के बाद अब आप आसानी से समझ सकते है की Social media पर 1K, 1M या 1B की value कितनी होती हैं।

अगर आपको अभी भी समझ में परेशानी आ रही हैं। तो चलिए आपको उदाहरण के साथ समझाने की कोशीस करते हैं।

1K = 1000 means 1000 Views, 1000 Likes, 1000 Comments, 1000 Subscribers या 1000 Followers.

1M = 10,00000 means 10,00000 Views, 10,00000 Likes, 10,00000 Comments, 10,00000 Subscribers, या 10,00000 Followers.

  • अपने ख़ुद के फ़ोटो का 3D Photo कैसे बनाए? मोबाइल से

1K, 1M और 1B इस्तमाल करने के क्या फ़ायदे हैं?

आपके दिमाग में यह सवाल जरुर आ रहा होगा की 1K या 1M लिखने से क्या फायदा होगा। तो आप ख़ुद सोचकर देखिए अगर social media sites पर 1k की जगह 1000 लिखा हो और 1M की जगह 1000000 लिखा हो। तो देखने में कितना अटपटा सा लगेगा। शायद आपको भी देखने में अच्छा ना लगेगा।

इसके अलावा मान लीजिये अगर किसी videos या photos पर 1 करोड़ से ज्यादा views या likes मिले हैं। तो उस जगह पर 1000,0000 की बजाय 10M लिखना ज्यादा suitable हैं।

अब आपने अच्छे से जान लिया है की 1K meaning, 1M meaning और 1B meaning क्या होता है? उम्मीद करते है अब आप social media साईट पर 1K, 1M या 1B देखकर आसानी से उसका मतलब समझ सकते हैं।

  • Mobile se bolkar call kaise kare? ग़जब का तरीका

अगर आपको 1k means in hindi & 1 million means in hindi की जानकरी पसंद आयी हो। तो आप इस जानकारी को अपने चाहने वालो के साथ social media sites पर Share जरुर करे। धन्यवाद .

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डिजिटल मार्केटिंग क्या है? [Digital Marketing in Hindi]

Digital marketing kya hai

What is Digital Marketing in Hindi? – आज के युग में सब ऑनलाइन हो गया है। इंटरनेट ने हमारे जीवन को बेहतर बनाया है और हम इसके माध्यम से कई सुविधाओं का आनंद केवल फ़ोन या लैपटॉप के ज़रिये ले सकते है।

Online shopping, Ticket booking, Recharges, Bill payments, Online Transactions (ऑनलाइन शॉपिंग, टिकट बुकिंग, रिचार्ज, बिल पेमेंट, ऑनलाइन ट्रांसक्शन्स) आदि जैसे कई काम हम इंटरनेट के ज़रिये कर सकते है । इंटरनेट के प्रति Users के इस  रुझान की वजह से बिज़नेस Digital Marketing (डिजिटल मार्केटिंग) को अपना रहे है ।

यदि हम market stats की ओर नज़र डालें तो लगभग 80% shoppers किसी की product को खरीदने से पहले या service लेने से पहले online research करते है । ऐसे में किसी भी कंपनी या बिज़नेस के लिए डिजिटल मार्केटिंग महत्वपूर्ण हो जाती है।  

डिजिटल मार्केटिंग का तात्पर्य क्या है? [Digital Marketing Kya Hai?]

डिजिटल मार्केटिंग क्या है?

अपनी वस्तुएं और सेवाओं की डिजिटल साधनो से मार्केटिंग करने की प्रतिक्रिया को डिजिटल मार्केटिंग कहते है ।डिजिटल मार्केटिंग इंटरनेट के माध्यम से करते हैं । इंटरनेट, कंप्यूटर,  मोबाइल फ़ोन , लैपटॉप , website adertisements या किसी और applications द्वारा हम इससे जुड सकते हैं।

1980 के दशक में सर्वप्रथम कुछ प्रयास किये गये डिजिटल मार्किट को स्थापित करने में परंतु यह सम्भव नही हो पाया । 1990 के दशक मे आखिर मे इसका नाम व उपयोग शुरु हुआ।

डिजिटल मार्केटिंग नये ग्राहकों तक पहुंचने का सरल माध्यम है। यह विपणन गतिविधियों को पूरा करता है। इसे ऑनलाइन मार्केटिंग भी कहा जा सकता है। कम समय में अधिक लोगों तक पहुंच कर विपणन करना डिजिटल मार्केटिंग है। यह प्रोध्योगीकि विकसित करने वाला विकासशील क्षेत्र है।

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डिजिटल मार्केटिंग से उत्पादक अपने ग्राहक तक पहुंचने के साथ ही साथ उनकी गतिविधियों, उनकी आवश्यकताओं पर भी दृष्टी रख सकता है। ग्राहकों का रुझान किस तरफ है, ग्राहक क्या चाह रहा है, इन सभी पर विवेचना डिजिटल मार्केटिंग के द्वारा की जा सकती है। सरल भाषा में कहें तो डिजिटल मार्केटिंग डिजिटल तकनीक द्वारा ग्राहकों तक पहुंचने का एक माध्यम है।

डिजिटल मार्केटिंग क्यो आवश्यक है ? [Importance of Digital Marketing in Hindi]

डिजिटल मार्केटिंग क्या है?

यह आधुनिकता का दौर है और इस आधुनिक समय में हर वस्तु में आधुनिककरन हुआ है। इसी क्रम में इंटरनेट भी इसी आधुनिकता का हिस्सा है जो जंगल की आग की तरह सभी जगह व्याप्त है। डिजिटल मार्केटिंग इंटरनेट के माध्यम से कार्य करने में सक्षम है।

आज का समाज समय अल्पता से जूझ रहा है, इसलिये डिजिटल मार्केटिंग आवश्यक हो गया है। हर व्यक्ति इंटरनेट से जुड़ा है वे इसका  उपयोग हर स्थान पर आसानी से कर सकता  है । अगर आप किसी से मिलने को कहो तो वे कहेगा मेरे पास समय नही है, परंतु सोशल साइट पर उसे आपसे बात करने में कोई समस्या नही होगी । इन्ही सब बातों को देखते हुए डिजिटल मार्केटिंग इस दौर में अपनी जगह बना रहा है ।

जनता अपनी सुविधा के अनुसार इंटरनेट के जरिये अपना मनपसंद व आवश्यक सामान आसानी से प्राप्त कर सकती है । अब बाज़ार जाने से लोग बचते हैं ऐसे में डिजिटल मार्केटिंग बिज़नेस को अपने products और services लोगो तक पहुंचाने में मदद करती है। डिजिटल मार्केटिंग कम समय में एक ही वस्तु के कयी प्रकार दिखा सकता है और उप्भोक्ता को जो उपभोग पसंद है वे तुरंत उसे ले सकता है।  इस माध्यम से उपभोकता का बाज़ार जाना वस्तु पसंद करने, आने जाने में जो समय लगता है वो बच जाता है ।

ये वर्तमान काल में आवश्यक हो गया है । व्यापारी को भी व्यापार  में मदद मिल रही है। वो भी कम समय में अधिक लोगो से जुड़ सकता है और अपने उत्पाद की खूबियाँ उपभोक्ता तक पहुँचा सकता  है।

वर्तमान समय में डिजिटल मार्केटिंग की मांग – [Future of Digital Marketing in Hindi]

डिजिटल मार्केटिंग क्या है?

परिवर्तन जीवन का नियम है , यह तो आप सब जानते ही हैं। पहले समय में और आज के जीवन में कितना बदलाव हुआ है और आज इंटरनेट का जमाना है । हर वर्ण के लोग आज इंटरनेट से जुड़े है,  इन्ही सब के कारण सभी लोगो को एक स्थान पर एकत्र कर पाना आसान है जो पहले समय में सम्भव नही था । इंटरनेट के जरिये हम सभी व्यवसायी और ग्राहक का तारतम्य स्थापित भी कर सकते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग की मांग वर्तमान समय में बहुत प्रबल रुप में देखने को मिल रही है। व्यापारी जो अपना सामान बना रहा है , वो आसानी से ग्राहक तक पहुंचा रहा है।  इससे डिजिटल व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है ।

पहले विज्ञापनो का सहारा लेना पड़ रहा था। ग्राहक उसे देखता था, फिर पसंद करता था , फिर वह उसे खरीदता था। परंतु अब सीधा उपभोक्ता तक सामान भेजा जा सकता है । हर व्यक्ति गूगल, फेसबुक , यूट्यूब आदि उपयोग कर रहा है, जिसके द्वारा व्यापारी अपना उत्पाद-ग्राहक को दिखाता है । यह व्यापार सबकी पहुंच में है- व्यापारी व उपभोक्ता की भी।

हर व्यक्ति को आराम से बिना किसी परिश्रम के प्रतयेक  उपयोग की चीज़ मिल जाती है। व्यापारी को भी यह सोचना नही पड़ता कि वह अखबार, पोस्टर, या विज्ञापन का सहारा ले। सबकी सुविधा के मद्देनजर इसकी मांग है। लोगों का विश्वास भी डिजिटल मार्किट की ओर बड़   रहा है। यह एक व्यापारी के लिये हर्ष का विषय है। कहावत है “ जो दिखता है वही बिकता है” – डिजिटल मार्किट इसका अच्छा उदाहरण है ।

डिजिटल मार्केटिंग के प्रकार [Types of Digital Marketing]

डिजिटल मार्केटिंग क्या है?

सबसे पहले तो आपको यह बता दे कि डिजिटल मार्केटिंग करने के लिये ‘इंटरनेट’ ही एक मात्र साधन है। इंटरनेट  पर ही हम अलग-अलग वेबसाइट के द्वारा डिजिटल मार्केटिंग कर सकते हैं । इसके कुछ प्रकार के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं –

(i) सर्च इंजन औप्टीमाइज़ेषन या SEO

यह एक ऐसा तकनीकी माध्यम है जो आपकी वेबसाइट को सर्च इंजन के परिणाम पर सबसे ऊपर जगह दिलाता है जिससे दर्शकों की संख्या में बड़ोतरी होती है। इसके लिए हमें अपनी वेबसाइट को कीवर्ड और SEO guidelines के अनुसार बनाना होता है।

(ii) सोशल मीडिया (Social Media)

सोशल मीडिया कई वेबसाइट से मिलकर बना है – जैसे Facebook, Twitter, Instagram, LinkedIn, आदि । सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्ति अपने विचार हजारों लोगों के सामने रख सकता है । आप भली प्रकार सोशल मीडिया के बारे में जानते है । जब हम ये साइट देखते हैं तो इस पर कुछ-कुछ अन्तराल पर हमे विज्ञापन दिखते हैं यह विज्ञापन के लिये कारगार व असरदार जरिया है।

(iii) ईमेल मार्केटिंग (Email Marketing)

किसी भी कंपनी द्वारा अपने उत्पादों को ई-मेल के द्वारा पहुंचाना ई-मेल मार्केटिंग है। ईमेल मार्केटिंग हर प्रकार से हर कंपनी के लिये आवश्यक है क्योकी कोई भी कंपनी नये प्रस्ताव और छूट ग्राहको के लिये समयानुसार देती हैं जिसके लिए ईमेल मार्केटिंग एक सुगम रास्ता है।

(iv) यूट्यूब चेनल (YouTube Channel)

सोशल मीडिया का ऐसा माध्यम है जिसमे उत्पादक अपने उत्पादों को लोगों के समक्ष प्रत्यक्ष रुप से पहुंचाना है। लोग इस पर अपनी प्रतिक्रया भी व्यक्त कर सकते हैं। ये वो माध्यम है जहां बहुत से लोगो की भीड़ रह्ती है या यूं कह लिजिये की बड़ी सन्ख्या में users/viewers यूट्यूब पर रह्ते हैं।  ये अपने उत्पाद को लोगों के समक्ष वीडियो बना कर दिखाने का सुलभ व लोकप्रिय माध्यम है।

(v) अफिलिएट मार्केटिंग (Affiliate Marketing)

वेबसाइट, ब्लोग या लिंक के माध्यम से उत्पादनों के विज्ञापन करने से जो मेहनताना मिलता है, इसे ही अफिलिएट मार्केटिंग कहा जाता है। इसके अन्तर्गत आप अपना लिंक बनाते हैं और अपना उत्पाद उस लिंक पर डालते है । जब ग्राहक उस लिंक को दबाकर आपका उत्पाद खरीदता है तो आपको उस पर मेहन्ताना मिलता है।

(vi) पे पर क्लिक ऐडवर्टाइज़िंग या PPC marketing

जिस विज्ञापन को देखने के लिए आपको भुगतान करना पड़ता है उसे ही पे पर क्लिक ऐडवर्टीजमेंट कहा जाता है। जैसा की इसके नाम से विदित हो रहा है की इस पर क्लिक करते ही पैसे कटते हैं । यह हर प्रकार के विज्ञापन के लिये है ।यह विज्ञापन बीच में आते रह्ते हैं। अगर इन विज्ञापनो को कोई देखता है तो पैसे कटते हैं । यह भी डिजिटल मार्केटिंग का एक प्रकार है।

(vii) एप्स मार्केटिंग (Apps Marketing)

इंटरनेट पर अलग-अलग ऐप्स बनाकर लोगों तक पहुंचाने और उस पर अपने उत्पाद का प्रचार करने को ऐप्स मार्केटिंग कहते हैं । यह डिजिटल मार्केटिंग का बहुत ही उत्तम रस्ता है। आजकल बड़ी संख्या में लोग स्मार्ट फ़ोन का उपयोग कर रहे हैं । बड़ी-बड़ी कंपनी अपने एप्स बनाती हैं और एप्स को लोगों तक पहुंचाती है।

डिजिटल मार्केटिंग की उपयोगिताएं – [Uses of Digital Marketing in Hindi]

डिजिटल मार्केटिंग क्या है?

डिजिटल मार्केटिंग की उपयोगिता के बारे में हम आप को बता रहे हैं –

(i) आप अपनी वेबसाइट पर ब्रोशर बनाकर उस पर अपने उत्पाद का विज्ञापन लोगों के लेटेर-बॉक्स पर भेज सकते हैं। कितने लोग आपको देख रहे हैं यह भी पता लगाया जा सकता है।

(ii) वेबसाइट ट्रेफ़िक- सबसे ज्यादा दर्शकों की भीड़ किस वेबसाइट पर है – पहले ये आप जान ले , फिर उस वेबसाइट पर अपना विज्ञापन डाल दें ताकी आपको अधिक लोग देख सकें ।

(iii) एटृब्युषन मॉडलिंग – इसके द्वारा ह्म यह पता कर सकते है की आजकल लोग किस उत्पाद में रुचि ले रहे हैं या किन-किन विज्ञापनों को देख रहे हैं । इसके लिये विशेश टूल का प्रयोग करना होता है जो की एक विशेश तकनीक के द्वारा किया जा सकता है और ह्म अपने उपभोक्ताओं की हरकतें यानी उनकी रुचि पर नज़र रख सकते हैं।

आप अपने उपभोक्ता से किस प्रकार सम्पर्क बना रहे हैं यह विषय महत्वपूर्ण है। आप उनकी आवश्यक्ता के साथ पसंद पर भी दृष्टी बनाकर रखा करें ऐसा करने से व्यापार में वृद्घि हो सकती है।

आप पर उनका विश्वास भी अत्यन्त आवश्यक है, की वह विज्ञापन देख कर आपका उत्पाद खरीदने में संकोच न करें तुरंत ले लें। इनके विश्वास को आपने विश्वास देना है। ग्राहक को आश्वासन दिलाना आपका दायित्व है। अगर किसी को सामान पसंद न आये तो उसको बदलने के लिये वो अपना संदेश आप तक पहुंचा सके इसके लिये ईबुक आपकी सहायता कर सकता है।

निष्कर्ष [Digital Marketing Kya hai?]

डिजिटल मार्केटिंग एक एसा माध्यम बन गया है जिससे कि मार्केटिंग (व्यापार) को  बढ़ाया जा सकता है। इसके उपयोग से सभी लाभान्वित हैं । उपभोक्ता व व्यापारी के बीच अच्छे से अच्छा ताल-मेल बना रहे हैं , इसी सामजस्य को डिजिटल मार्केटिंग द्वारा पूरा किया जा सकता है । डिजिटल मार्केटिंग आधुनिकता का एक अनूठा उद्धरण है।

आशा है की आप भी डिजिटल मार्केटिंग से लाभांवित होंगे।

“उत्पादो की बहार, हमारा डिजिटल व्यापार।”

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Table of Contents

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Verbs In Hindi: Forms And Types With Examples

Verbs in Hindi

Verb! Is word ko to aapne English mai kayi baar suna hoga. Lekin kya aap jante hai ki Verbs kya hai ya Verb kya hota hai? Is article mai hum aapko detail me batayenge ke Verb kya hota hai? Yani ke Verb meaning in Hindi kya hai? Aur types of Verbs konse hai aur ye English bolne me ya likhne mai  aur aapki English Grammar improve karne mai aapki kis tarah help karke aapke sentences ko meaningful banate hai. Toh chaliye shuru karte hai.

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Verb Word Kaise Banaya Gaya?

Verb banaya gaya hai ek Latin word “Verbum” se, jiska English mai meaning hai “word” aur Hindi me ise kaha jata hai “Shabd”. Verb ko Hindi mai kaha jata hai “Kriya”.

Verb Kya Hota Hai? Verb Kise Kehte Hai?

Verb kise kehte hai?

Verb ek aise word ya combination of words ko kaha jata hai jo kisi action, event ya state ya condition ko darshata hai.Verb sentence ka wo part hai jo hume batata hai ki sentence mai jo subject hai uska action kya ka, aap ki understanding ke liye kaha jaye to sentence me hum jis kisi ke baare mai baat kar rahe hai wo kya kar raha hai.

Verb English Grammar ka ek important part hai, ya ise heart of the sentence bhi kaha ja sakta hai. Aaiye Verbs in Hindi ke kuch examples dekhte hai.

  • Ye Verbs physical action ko darshate hai aur inhe Normal Verbs ya Action Verbs bhi kaha jata hai, aaiye dekhte hai iske examples. To swim – Tairna, To write – Likhna, To climb – Chadhna.

Physical actions ke kuch examples

Physical Action

  • She sells books and bags – Wo books aur bags bech rahi hai. Is sentence mai  “sells” yani “bech rahi” ek Verb hai. “ Sells” jo ke ek physical activity hai wo darsha raha hai.
  • The doctor wrote the prescription – Doctor ne prescription likha hai. Is sentence mai word “wrote” ek Verb hai jo “Likhne” ki physical activity ko darsha raha hai.
  • Ruby bought a ticket – Ruby ne ticket khareedi . Is sentence me “bought” yani ke “khareedi” ek Verb hai khareedne ki physical activity ko darsha raha hai. 
  • Ye mental action ko darshane wale Verbs hote hai, ye wo Verbs hote hai jo aise kaam ko batate hai jo hum kisi ko physically karte hue nahi dekh sakte. Inhe “Non – Continious Verbs” bhi kaha jata hai. jaise ke:To think – Sonchna, To guess – Guess karna, To consider – Consider karna 

Aaiye inke kuch examples sentences mai dekhte hai:

Mental-State Verbs

Mental actions ke kuch examples

  • She considers the job done – Us ne consider kiya ke job pura ho chuka hai. Is sentence mai  “considers” Verb hai. Ye word consider karne ki mental activity ko darshata hai
  • Peter guessed the number right.- Peter ne number sahi guess kiya hai. Is sentence me “guessed” ek Verb hai aur ye guess karne ki activity ko darsha raha hai
  • I thought the same thing. – Maine yahi socha tha. Is sentence me “thought” ek Verb hai aur ye sochne ki activity ko darshata hai.

Verbs state of being ya condition ko batate hai, inhe Linking Verbs bhi kaha jata hai, jaise ke: To be – Hona, To exist – Exist karna, To appear – Appear hona

Ye group of words bahut hi chote hote hai lekin ye bahut important bhi hote hai. Ye words kisi bhi activity ko express nahi karte. Is group me sab se important Verb hai “to be”. State of being Verbs ko “Linking Verbs” bhi kaha jata hai.

State Of Being


Was Am Will be 
YouWere Are Will be
He / She / ItWas Is Will be 
We Were Are Wil be 
They Were / beenAre / beingWill be 

Aaiye is ke kuch examples dekhte hai Hindi mai.

  • Edwina is the largest elephant in this area – Edwina is area ka sab se bada hathi hai. Is sentence mai “is” ek Verb hai jo ki “to be” form of Verb se bana hai.
  • It was a joke – Wo joke tha. Is sentence me “wo” ek Verb hai. Jo ki “to be” form of Verb se bana hai 
  • I am – Mai. Ye word “I am” ek Verb hai jo ki “to be” form of Verb se banta hai.

(Point of Interest: “I am” English ka sab se chota sentence hai.)

Action Verbs aur Linking Verbs strong hote hai aur wo sentence mai directly use kiye ja sakte hai. Inko “Main Verbs” bhi kaha jata hai. Jaise ke:

Action Verbs

  • I love cheese – Mujhe cheese pasand hai 

Linking Verbs 

  • I am a teacher – Mai teacher hu

Verbs mai ek aur category hoti hai jise “Helping Verbs” kaha jaata hai. Ye Verbs stand alone nahi karte sentence mai action aur linking Verbs ki tarah. Isi liye ye zyada notice nahi kiye jate. Jaise ke: is, are, be, have etc.

Helping Verbs

Janiye Forms Of Verbs In Hindi 

English Verb Forms

Aap ne dekh liya aur samajh bhi liya hoga ke Verbs with examples kya hai. Ab aage badhte hai aur aapko batate hai forms of Verbs in Hindi.

Verbs ke six basic forms hote hai

a) Base form

Base form of Verb ko Root form of Verb bhi kaha jata hai. Inme suffixes aur Prefixes nahi hote. Jaise ke: See, be, were, go etc.

Base form of Verbs jab conjugate hote hai to inse dusre Verbs banaye ja sakte hai. 

Example: 

  • I am going to school. – Mai school ja raha hu. (Base form hai “go” yani ke ja raha)
  • Children play in the field – Bacche khet me khelte hai ( Base form hai “khelte”)
  • What did you do yesterday? – Kal tumne kya kiya? (Base form hai “do” yani ke “karna”) 

b) Infinitive Form

      Infinitive form of Verbs un Verbs ko kaha jata hai jin ke aage “to” lagta hai. 

  • Tell them not to play – un se keh do ke wo na khele
  • I like to dance – Mujhe dance karna pasand hai  
  • I like to write stories – Mujhe stories likhna pasand hai 

c) Past Tense Verb Form

     Ye wo words hote jo past me hue kaam ko batate hai. Jaise ke

  • They played football yesterday – Un logon ne kal football khela tha  
  • They visited the doctor that day – Un logon ne us din doctor ke paas visit kiya tha 
  • She drank milk – Usne doodh piya 

d) Past Participle Verb Form

     Past participle form of Verb three types se banta hai. Aaiye dekhte hai past participle meaning in Hindi kya hai.

  • Jo word kisi Verb se banta hai 
  • Yeh words Verb, Tense ya Adjectives ke liye use hote hai
  • Ye words usually ed, d, t, en or n, se end hote hai
  • I have forgotten my lines – Mai apne lines bhool gaya
  • She had whispered him the answer – Use ne answer whisper kardiya
  • She has taken the medicine – Usne medicine le li hai 

e)  Present Participle form of Verb

Jaante hai Present Participle meaning in Hindi. Present Participle un words ko kaha jata hai jo base word ke saath “ing” use karte hai. Usually ye Adjectives ka function perform karte hai, ye Verb jaise bhi kaam karte hai aur subject in construction jaise bhi kaam karte hai.

  • I am watching Television – Mai television dekh raha hu
  • She is eating food – Wo khana kha rahi hai 
  • Ruby is playing – Ruby khel rahi hai

f) Gerund 

Dekhte hai Gerund meaning in Hindi. Gerund un words ko kaha jata hai jo bante to Verbs se hai lekin Noun jaisa kaam karte hai. Ye bahut aasani se pehchane jate hai. Simple words mai agar kaha jaye to har Gerund wo Verb hota hai jis ke peeche “ing” laga hota hai. 

Yahan ye dhyan rakhna hota hai ki Present Participle form of Verbs bhi “ing” se end hote hai. 

Ab aap ye soch rahe honge ke kaise pehchana jaye ke kon sa word Gerund hai aur kon sa Present Participle form of Verb hai. Chaliye hum aapko batate hai. 

Gerund And Present Participle Mai Difference Janiye 

Gerunds

Agar aap Verb ki defination par focus kare to aap dekhenge ki hum ne padha tha ke Gerunds bante to Verbs se hai lekin wo Noun jaisa kaam karte hai. Lekin Present Participle Noun jaisa kaam nahi karte balke wo modifiers ya complete progressive Verbs jaisa kaam karte hai.

Sentence me Gerund ko pehchanne ke liye dekhiye ”Verb” +”ing” jo Noun jaise kaam kar raha hai.

  • Gerund As Subjects – Gerund Subjects Ke Roop Mai 
  • Reading is relaxing – Reading relaxing hoti hai
  • Writing is an exchange of ideas – Writing exchange of ideas hota hai

Gerund Phrases As Subject – Gerund Phrases Ke Roop Mai

  • Swimming laps is the most relaxing activity in the world – Swimming laps sab se relaxing activity hai duniya me. 
  • Filing papers can give you a paper cut – Papers filing aap ko papercut de sakte hai
  • Gerund As Direct Objects – Gerund Direct Objects Ke Roop Mai
  • I love reading – Mujhe padhna pasand hai (Verb = Love, Love what? = Reading)
  • Patrick likes photographing nature – Patrick ko nature ki photographing karna pasand hai (Verb = Likes, Likes what? = Photographing)

Gerund Phrases As Direct Objects – Gerund Phrases Direct Objects Ke Roop Mai 

  • I enjoy shopping with friends – Mujhe friends ke saath shopping jana pasand hai 

(Verb = Enjoy, Enjoy what? = Shopping with friends)

  • My friends anticipated our trying on new shoes – Mere friends ne anticipate kiya hamare naye shoes try karne pe
  • Gerund As Indirect Objects – Gerund Indirect Objects Ke Roop Mai
  • I never gave reading enough of a chance – Maine reading ko kabhi zyada chance nahi diya (Verb = Gave, Gave what? = Reading)
  • Last week, I made studying my priority – Last week mai ne padhai ko apni priority banayi hai (Verb = Made, Made what? = Studying)

Gerund Phrases As Indirect Objects – Gerund Phrases Indirect Objects Ke Roop Mai

  • As part of her writing process, she began recording every detail . – Uske writing process ke part ke according, us ne har detail ko record karna shuru kar diya. 

(Verb = Began, Began What? = Recording every detail)

  • Once Tom gave the order, he started collecting all the evidence – Ek baar Tom ne order de diya, usne saare evidence collect karna shuru kardiya.

Ab aap samajh gaye honge Gerund meaning in Hindi aur ise kis tarah se sentence mai use karte hai. 

Ab aage badhte hai aur dekhte types of Verbs in Hindi.

Verbs Kitne Prakar Ke Hote Hai –  Types Of Verbs In Hindi And English

Types of Verbs

Verbs in Hindi twelve prakar ke hote hai. Inko kaha jata hai “Mixed Verbs”. Dekhte hai wo kya hai.

  • Transitive Verbs – Sakarmak Kriya 
  • Intransitive Verbs – Akarmak Kriya
  • Dynamic / Event Verbs  – Gaatyatmak Kriya
  • Stative Verbs – Sthithi Suchak Kriya 
  • Perception / Sensation Verbs – Bhavana Dharana Kriya
  • Linking / Copular / Predicating Verbs – Videh Kriya
  • Phrasal / Prepositional Verbs – Sanbandha Bodhak Kriya
  • Modal Auxiliary Verbs – Rupatmak Kriya
  • Helping Verbs / Auxiliary Verbs – Sahayak Kriya
  • Hypothesis Verbs – Parikalpanatmak Kriya
  • Causative Verbs – Kaaran Vachak Kriya
  • Regular and Irregular Verbs – Niyamit aur Aniyamit Kriya

1. Transitive Verbs in Hindi – Sakarmak Kriya

Transitive Verbs

Transitive Verbs, action Verbs hote hai jinka ek object hota hai, action ya ek complete thought receive karne ke liye. Ye Verbs ke baad Noun ya Noun phrase aata hai.

 Aaiye is ke example dekhte hai.

  • She drinks water – Wo pani pi rah i hai. Is sentence mai pani direct object hai aur drinks Transitive Verb hai.
  • He drove the car – Usne car chalayi. Is sentence mai car direct object hai aur drove Transitive Verb hai 
  • I saw the dog – Maine dog dekha . Is sentence mai dog direct object hai aur saw Transitive Verb hai 
  • Lee ate the pie. Lee ne pie khayi. Is sentence mai Pie direct object hai aur ate Transitive Verb hai
  • The postman will give Sarah “the letter”. Is sentence mai letter direct object hai aur will give transitive Verb hai.

Transitive Verbs ko pehchanne ke liye aap ko Verb ko find out karna padega aur question karna padega ke “kya?” for example “ kya dekha?”, “kya kiya?”, “kya bola?”. 

2. Intransitive Verbs In Hindi – Akarmak Kriya

 Transitive Verbs

Intransitive Verbs ka koi direct object nahi hota agar dusre words me bola jaye to ye kisi cheez par act nahi karte jaise ke Transitive Verbs karte hai. Ye Verb sirf subject ko involve karta hai. Ye Transitive Verb ka opposite hota hai.

Ab aap soch rahe honge ke direct object se kya matlab hai. Aaiye dekhte hai.

“Taking A Direct Object” Ka Matlab Kya Hai?

Intransitive Verb direct object nahi leta. Aaiye is ko examples ke through samajhte hai.

  • He laughed – Wo hasa . Laughed ek Intransitive Verb hai. Is ka koi direct object nahi hai. Yahan kis par hasa ja raha hai  ye nahi bataya ja raha hai balki sirf itna bataya ja raha hai ke wo hasa. 
  • He disappeared after the party – Woh party ke baad gayab ho gaya . Is sentence mai “disappeared” ka koi direct object nahi hai aur ghayab ek Intransitive Verb hai. 
  • She is crying – Wo ro rahi hai.
  • The sun shines – Suraj chamak raha hai 

Note karne wali baat ye hai ke kuch Verbs jaise ke: cheer, sing, visit, trip, Transitive Verb aur Intransitive Verb dono ho sakte hai, inka usage sentence pe depend karta hai, ke wo sentence me kis tarah use kiye ja rahe hai.

Aaiye iske kuch examples dekhte hai. 

  • He sang – Wo gaaya. Yahan par ye nahi bataya ja raha hai ke wo kya gaaya ya kiske liye gaaya, bas itna bataya ja raha hai ke wo gaaya. Is ka koi direct object nahi hai isi liye ye Intransitive Verb kehlayega.
  •  He sang a song – Wo geet gaaya. Is sentence me hame ye bataya ja raha hai ke us ne “geet” gaaya. Yahan object hai “geet”. Isi liye ye Transitive Verb kehlaya jayega.

Chaliye aage badhte hai Dynamic / Event Verbs  – Gaatyatmak Kriya ki oar. 

3. Dynamic / Event Verbs in Hindi  – Gaatyatmak Kriya

Dynamic / Event Verbs wo hote hai jin me body movements involve hote hai.Ye Verbs apne subject par continued or progressive action batate hai. Jaise ke: act, build, complete, design, draw, gather, help, interview, justify, listen, negotiate, outline, perform, record, save, show, travel, uncover, value, write, zoom etc.

Aaiye Dynamic / Event Verbs in Hindi ke kuch examples dekhte hai.

  • She was writing a letter – Wo letter likh rahi thi
  • They are playing in the playground – Wo log playground me khel rahe hai 
  • They are interviewing that girl – Wo log us ladki ka interview le rahe hai 
  • Ramu is helping his mother in cooking – Ramu apni maa ki help kar raha ha i cooking mai
  • Ruby is drawing a picture – Ruby picture draw kar rahi hai  

Ab aap samajh gaye honge ke Dynamic yani ke Event Verb kya hai aur wo kaise sentence mai use hote hai. Aaiye ab aage badhte hai aur jaante hai Stative Verbs in Hindi kya hai.

4. Stative Verbs In Hindi – Sthithi Suchak Kriya

Stative Verb

Stative Verbs in Hindi  wo Verbs  hote hai jo action se zyada state ko express karte hai. Ye Verb usually mental feelings, emotions, state of a person, place, relationships, sense and measurements ko darshata hai. 

Stative Verbs ke kuch important key takeaways:

  • Stative Verbs, Action ya Dynamic Verbs nahi hote.
  • Stative Verbs describe karte hai ke koi cheez kaisi hai, ya to yeh Verbs mental process batate hai

Stative Verbs ko “being Verbs” bhi kaha jata hai. Especially wo case mai jahan be, am, is, are, was and were use hota hai. 

Stative Verbs four types ke hote hai. Jo hai Senses, Being, Possession aur Emotion. Ye words multiple categories me fit hote hai aur ye depend karta hai unke usage par. Inko four types me group kiya gaya hai. Aaiye dekhte hai wo kya hai.

  • Perception and Sensation (Example – See, hear, smell, hurt, taste etc.)
  • Cognition, Emotion, Attitude (Example – sochna, feel karna, bhool jana, remember etc)
  • Having and Being (Example: be, have, have to, cost, require etc)
  • Stance (Example Sit, stand, lie, live, face etc)

Aaiye dekhte hai ye four types ke Stative Verbs aur inke examples.

  • Sensing Verbs 

Jo data hamare five senses mai aata hai hum use Sensing Verbs kahenge. Jaise ke:

  • See – Dekhna
  • Hear – Sunna
  • Smell – Soonghna
  • Taste – Taste Karna
  • Sound – Awaz 
  • Look – Dekhna
  • Emotion and Thought Verbs

Emotion and Thought Verbs hamare emotions aur soch ko darshata hai. Jaise ke:

  • Love – Chahna
  • Hate – Nafrat Karna
  • Adore – Bahut zyada pasand karna
  • Forget – Bhool jana
  • Believe – Bharosa karna
  • Think – Sochna
  • Possession Verbs

Possession Verbs wo hote hai jo possess karne ki quality ko darshata hai. Jaise ke:

  • Have – Hai
  • Belong – Jis kisi ka
  • Include – Add karna
  • Need – Zarurat
  • Want – chahiye
  • Own – Khud ka
  • Being / Qualities Verbs

Ye un Verbs ko kaha jata hai jo state of being ya qualities ko batate hai. Jaise ke:

  • Be / Are / Is
  • Contain 

Aaiye sentences mai is ke kuch examples dekhte hai.

  • I believe in God – Mai God me Vishwas rakhti hu
  • It sounds like a great idea – Ye idea bahut accha lag raha hai 
  • I feel your sadness – Mai tumhara sadness feel kar sakta hu

Ab aap samajh gaye honge ke Stative Verbs kya hai aur inhe sentence mai kaise use kiya jata hai. Chaliye aage badhte hai Perception / Sensation Verbs ki taraf. 

5. Perception / Sensation Verbs In Hindi – Bhavana Dharana Kriya

perception

Perception Verbs jinhe Sensation Verbs bhi kaha jata hai wo hamare five senses ko darshata hai. Jo hai , See, Smell, Taste, Touch, Hear. Aaiye is ke kuch examples dekhte hai.

  • I smell the flowers – Maine phoolon ko soongha 
  • He is listening to the radio – Wo radio sun raha hai 
  • He is tasting the cake – Wo cake ko taste kar raha hai 
  • He is looking at me – Wo mujhe dekh raha hai
  • He touched the roof – Usne roof ko touch kiya  

6. Linking / Copular / Predicating Verbs – Videh Kriya

Linking Verbs

Linking Verbs action ko express nahi karte, balki wo Verb ke subject ko, subject ke related additional information se connect karte hai. In Verbs ke baad usually Adjectives ya Nouns aate hai. 

Dekhte hai true Linking Verbs in Hindi ke kuch examples.

  • Verb “be” ka koi bhi form jaise ke:am, is, are, was, were, has been, are being, might have been etc.

Ab dekhte hai wo Linking Verbs jin ki multiple personalities hoti hai. Ye sentence ke according kabhi Action Verb ki tarah kabhi Linking Verb ki tarah kaam karte hai.

  • Appear 
  • Remain 
  • Sound 

Chaliye dekhte hai in Linking Verbs in Hindi ke kuch examples sentences mai.

  • He had many talents but he could not utilize them – Uske paas kayi talents they lekin wo use utilize nahi kar paya.
  • The cake smells really good – Cake ki bahut acchi khusboo aa rahi hai 
  • He grew up in his village – Woh village me bada hua hai 
  • It appears to be a broken piece of glass – Aisa lag raha hai ke ye glass ka tuta hua piece hai.

7. Phrasal / Prepositional Verbs – Sanbandha Bodhak Kriya

Phrasal Verbs

Phrasal ya Prepositional Verbs, preposition aur adverbial particle ke combination se bante hai. Har preposition ka ek object hota hai isiliye saare prepostional verbs ke direct objects hote hai.

Ab aap soch rahe honge ke Adverbial particle kya hai?

Small adverbs jaise ke: above, about, in, out, up, down, before, across, off, on, below, behind etc ye Adverbial particle kehlaye jate hai.

Aaiye Phrasal / Prepositional Verbs ke kuch examples dekhte hai.

  • I believe in God – Mai God me believe karta hu
  • He is looking after the dog – Usne dog ki dekh bhaal ki 
  • They are talking about the issue – Wo log is issue ke baare me baat kar rahe hai 
  • The car ran over the pipe – Car pipe ke upar se chale gayi 
  • I got off the bus at school – Mai school ke paas bus se utar gayi. 

8. Modal Auxiliary Verbs In Hindi – Rupatmak Kriya

Modal and Auxiliary Verbs

Modal Auxiliary Verbs un Verbs ko kaha jata hai jo dusre Verbs se mil kar ideas ko expess karte hai. Jaise ke: possibility, prediction, speculation, deduction, and necessity. Modal Verbs speaker ke different moods aur attitudes ko darshata hai.

Jante hai rules for using Modal Verbs in a sentence

Shuru karne se pehle hum aapko Auxiliary ka meaning bata dete hai. Auxiliary ka meaning hai additional help and support provide karna.

  • Modal Verbs hamesha follow hote hai “infinitive without to” se.

I can swim – Mai tair sakta hu (Correct) 

I can to swim (Incorrect)

She could swimming well (Incorrect)

  • Modal Verbs sab pronouns ke liye same hote hai aur singular subjective pronouns mai “s” ya “es” nahi lagaya jata.

She can swim – Wo tair sakti hai  (Correct) 

She cans swim (Incorrect)

They can swim (Correct)

  • Modal Verbs ko auxiliaries ki zarurat nahi hoti. Ye directly negative aur question form lete hai.

Can you do this? – Kya tum ye kar sakte ho? (Correct)

Do you can do this? (Incorrect)

He may not like it. Us ko shayad ye pasand nahi aayega (Correct)

He does not may like it. (Incorrect)

Aaiye Modal Verbs aur in ke kuch examples dekhte hai:

  • Ability: Ali can swim – Ali tair sakta hai 
  • Permission: Can I come with you? – Kya mai tumhare saath aa sakta hu. Is sentence me “can” ki jagah “May” bhi use kiya ja sakta hai.
  • Offers: Can I help you? – kya mai tumhari help kar sakta hu?
  • General Possibility: You can speak fluent English. Tum fluent English mai baat kar sakte ho.
  • Possibility: I could do it, if you like – Mai ye kar sakta hu, agar tumhe pasand ho toh

Past ability: I could swim when I was three – Mai tair sakta tha jab mai teen saal ka tha.

  • Permission: Could I use your phone please? – Kya mai tumhara phone use kar sakta hu?
  • Requests: Could you babysit for us on Friday? – Kya tum hamare liye babysit karoge Friday ko?
  • To Suggest: We could write a letter to the director – Hum director ko letter likh sakte hai
  • Possibility: The director may come to our class – Director kal hamari class ko aa sakta hai
  • Permission – May I use your dictionary? – Kya mai aapki dictionary use kar sakta hu?

Yahan par dhyan me rakhne wali baat ye hai ki may aur might, past, present aur future mai hone wali possibility batate hai. Jab “may” use hota hai to is mai 50% sureity hoti hai. 

“Might” agar use kar rahe hai to might 30% doubt express karta hai.

  • Slight Possibility:  He said he might come tomorrow – Wo bol raha hai ke wo kal aa sakta hai
  • Past form of “may” in reported speech: The President said he might come – President ne kaha tha ke wo aa sakta hai
  • Polite Suggestion: You might try calling the help desk – Aap help desk ko call try kar sakte hai.
  • Shall 

Shall, will ka ek form hai, jo first person “I and we” ke saath use hota hai. Ye word question karte waqt use hota hai

  • Offers: Shall I order a coffee? – Kya mai coffee order karu?
  • Suggestion: Shall we go to the party tonight? – Ya aaj raat hum party par chale?
  • Future Tense Auxiliary: I will buy a computer tomorrow. – Mai kal ek computer kharidunga 
  • Invitations: Will you join us for dinner? – Kya tum hume dinner par join karoge?
  • Offers: Won’t you accept the appointment? – Kya tum ye appointment accept nahi karoge?
  • Certainty: They must be the winners – Hosakta hai ke wo winners ho
  • Necessity: Students must pass an entrance examination to study at this school – Is school me padhne ke liye students ko entrance examination pass karna hoga. 
  • Strong recommendation: They must come in time for the appointment. – Un ko time par aana hoga appointment ke liye
  • Prohibition: Rahul, you must not play in the street! – Rahul, tumhe gali me nahi khelna chahiye.
  • You should have studied more often (Past) – Tum ko zyada padhna chahiye tha
  • You should brush your teeth every day (Present) – Tum ko chahiye ke tum roz brush karo
  • They should take admission tomorrow (Future) – In ko kal admission le lena chahiye

“Ought to” word ka meaning bilkul “should” word jaisa hota hai, lekin “should” word thoda sa aur strong hota hai kyon ke wo negative consequence ke liye imply hota hai. In dono me aur ek difference ye bhi hai ke “Ought to” word question ke saath use nahi hota lekin “should” word question ke liye use hota hai.

  • I ought to see a doctor
  • Advice: If I were you, I would return the book – Agar mai tumhari jagah hoti to mai ye book return kar deti
  • Past form of will: I thought I would be late. So I would have to take the train. – Maine socha tha ke mai late ho jaunga. Is liye mai na train le li.
  • Hypothesis: It would be very expensive to stay in a hotel – Hotel mai stay karna bahut mehnga padega.

Aap ko ye note karna hai ke Have to, Has to, Will have to Modal Verbs nahi hote lekin wo unke equivalent hote jo express karte hai. Jaise ke: Express, Certainty, Necessity and Obligation. 

9. Helping Verbs / Auxiliary Verbs in Hindi – Sahayak Kriya

Auxiliary Verbs

Auxiliary or Helping Verbs use hote hai Main Verbs ke saath. Ye use hota hai Verb ka tense batane ke liye ya ek negative sentence form karne ke liye ya question form karne ke liye. Most common auxiliary Verbs hai: have, has, had, do, does, did aur to be Verbs.

  • Have they completed the assignment? – Kya unhone assignment complete karliya?
  • Ali is writing an email to a client. – Ali client ko email likh raha hai 
  • Samuel was playing with a ball – Samuel ball se khel raha tha

10. Hypothesis Verbs In Hindi – Parikalpanatmak Kriya

Hypothesis

Hypothesis Verbs wo Verbs hote hai jo follow kiye jate hai subjunctives se, yani ke related words se. Hypothesis Verbs un Verbs ko kaha jata hai jo kisi idea ya suggestion jo ke known fact par based ho, aur ye reasoning par based ho ya further investigation ke liye kaam aaye. 

“Wish” ko Hypothesis Verb kaha jata hai jab wo past tense ke saath use hota hai 

Is se pehle ke hum aage badhe hum aapko batate hai ke Infinitive Form kya hota hai 

Jab kisi Verb ke aage “to” lagta hai use Infinitive Form kehte hai. Jaise ke: to speak, to smoke etc.

Aaiye dekhte hai Hypothesis Verbs in Hindi “Wish” word ko different situations me kaise use karta hai

Wish

  • Wish + Infinitive 

Hum Wish + Infinitive formal situation me  kisi se kuch puchne ke liye use karte hai

  • I wish to see the manager, please – Mai manager is milna chahti hu, please
  • If you wish to reserve a table, please call after two hours – Agar aap table reserve karna chahte hai to please aap do ghante baad call kijiye. 

Wish + Object + Full Infinitive

  • We don’t wish our name to appear in the report –  Hum nahi chahte ke hamara naam report me aaye
  • I wish him to be here right now – Mai chahti hu ke woh abhi isi samay yahan par aaye

Note: “Wish” ek non progressive Verb hai aur ye progressive forms ke saath use nahi kiya jasakta

  • Wish + Object For Fixed Expression 

Wish two objects ke saath kuch good wishes ke fixed expressions ko batane ke liye use hota hai 

  • We wish you a happy birthday – Hum aap ko janam din ki badhai dete hai 
  • I wish you good luck in your final exam – Mai aap ko final exam ke liye good luck wish karti hu
  • Wish + Past indefinite tense for Present and Future Unreal

Hum “Wish” use karte hai “that” clause (Past Indefinite) ke saath jise hum informal style me likh sakte hai. Is case mai, “Wish” ka meaning “Want” nahi hota. Ye refer karta hai present and future situations jo unreal, impossible ya unlikely hai.

  • I wish (that) I had a big car – Mai wish kar raha hun ke mere paas ek badi car hoti
  • I wish (that) I could speak French – Mai wish kar raha hun ke mai French bol saku
  • Don’t you wish (that) you could fly? – Kya tum wish nahi karte ke tum fly karo?
  •  Wish + Past Continuous Tense  

Hum “Wish + Past Continuous Tense” use karte hai wo expression batane ke liye ke – hum chahte hai ke koi different action kare present mai ya future mai.

  • I wish it was raining, But it is not. (Present Continuous Tense) – Mai wish kar rahi thi ke barish ho, lekin nahi ho rahi.
  • I wish you weren’t leaving tomorrow. (Future Tense). Mai ye wish karti hun ke tum kal nahi ja rahe

Note: Is structure mai hum “were” ko use kar sakte hai “was” ki place par, especially formal style ke sentences mai.  

  • I wish (that) I was a doctor. (Informal)
  • I wish (that) I were a doctor. (Formal)
  •  Wish + Past Perfect Tense for Past Unreal:  

“Wish + Past Perfect Tenses”  past ke wishes ke liye use hote hai ya agar hum chahte hai ke past ka situation kuch different hota. 

  • I wish you hadn’t said that. (It would be nice if you hadn’t said that)
  • Now she wishes she had gone to college.
  •  Hope + First form of the verb for the Future Possibility: 

Wish + Past tenses generally un wishes ke liye use hote hai jo future me possible ho. Is sense mai usually hum “hope” word ka use karte hai.

  • I hope you pass your exams.
  • I hope you feel better tomorrow.
  •  Wish + Would:

Hum “Wish + would + Bare infinitive” ka use isliye karte hai ke hum present action ke saath hone wale impatience, annoyance aur dissatisfaction ko express kar sake ya sentence with wish + would express karta hai regret or annoyance, un kaam ke liye ya situation ke liye jo nahi hone wale hai 

  • I wish you would stop smoking. (You are smoking at the moment and it is annoying me.)
  • I wish it would stop raining. (I’m impatient because it is raining and I want to go outside.)

Note 1: Sentence with wish … un cheezon ko refer nahi karta jo hote hai ya future me ho sakte hai

  • I wish you wouldn’t keep making that stupid noise. (You will keep making ….)

Note 2: Wish + Wouldn’t  ek order ya request ho sakte hai

  • I wish you wouldn’t drive so fast. (Similar to please don’t drive so fast)
  • I wish you wouldn’t work on Sundays. (Why don’t you stop?)

Ab aap acche se samajh gaye honge ke Hyothesis Verbs kya hai. Chaliye aage badhte hai Causative Verbs in Hindi ki oar.

11. Causative Verbs In Hindi – Kaaran Vachak Kriya 

Causative Verbs

Causative Verbs mai hum direct action perform nahi karte balki hum wo action kisi aur se perform karwate hai yani ke hum ye action kisi second person se karwate hai. Is ka formula change ho jayega second person ke absence aur presence ke according. 

English Language me teen true Causative Verbs hai: Let, Have aur Make. Lekin is mai dusre Verbs bhi hai jaise ke cause, allow, help, enable, keep, force, require and persuade, jo ke Causative Verbs toh nahi hai lekin in ko Causative Verbs ki tarah hi use kiya jata hai 

Chaliye ab is ke examples dekhte hai:

Causative Verbs: Let, Have, Make

Let: kisi ko kuch karne ke liye allow karna.

Form: [let + person + verb]

  • The teacher let the students leave the class.
  • I won’t let her lend him money.
  • Will your parents let you go to the party tonight?

Have: Kisi ko kuch karne ki responsibility dena

Form: [have + person + verb]

  • We’re having a mechanic repair our car.
  • You’ve had your hair cut.
  • Please have your secretary fax me the information.

Get vs Have

Kabhi “get someone to do something” interchange ho sakta hai “have someone do something” se. Lekin note karne wali baat ye hai ke ye expressions exactly same baat nahi bata rahe hai.

Is ko aur detail mai samajhne ke liye aaiye dekhte hai is ke kuch examples.

  • I got the mechanic to check my brakes – Maine mechanic se  brakes check karwaye.. 

At first the mechanic didn’t think it was necessary, but I convinced him to check the brakes.

 Is sentence me ye bataya ja raha hai ki pehle to mechanic ne brakes check karna important nahi samjha lekin mai ne usey brakes check karne ke liye convince kar liya.

  • I had the mechanic check my brakes.- Mai ne mechanic se brakes check karne ko kaha. (I asked the mechanic to check the brakes.).

Note: Get someone to do something ka matlab hai kisi ko convince karna koi kaam karne ke liye. Is mai Infinitive Verb use hota hai na ki Base Verb

Make: Kisi ko koi kaam karne ke liye force karna

Form: [make + person + verb]

  • The teacher made him apologize for what he had said – Usne jo bola uske liye teacher ne usse apologize karaya.
  • Nothing will make me change my mind. – Koi bhi cheez mera mind change nahi kar sakti
  • She made her children do their homework. – Usne apne bachon se homework karwaya.

Structures Of Causative Verbs in Hindi

Causative Verbs ke structures two types ke hote hai

  • Active Form
  • Passive Form

Examples ke through jaaniye in dono forms me difference. 

  • Ali had his sister write the letter. (Active form) (Ali ne letter nahi likha. Uski sister ne letter likha hai. In a sense, Ali ne apni sister se letter likhne ko kaha aur uski sister ne accept karliya)
  • Ahmed had the house painted. (Passive form) (Ahmed ne ghar paint nahi kiya. Kisi aur ne ghar paint kiya lekin is sentence me hume ye to pata chal raha hai ke Ahmed ka ghar paint hua hai lekin kis ne paint kiya ye pata nahi chal raha hai.

Ab aapko clear ho gaya hoga ke Causative Verbs in Hindi kya hai aur ye kaise use kiye jate hai setence formation mai. Ab aage badhte hai hamare last form of Verbs in Hindi ki taraf. 

12. Regular and Irregular Verbs – Niyamit aur Aniyamit Kriya 

Regular And Irregular Verbs

Regular Verbs in Hindi

Regular Verbs bahut hi easy hote hai. Agar Verb already “e” se end ho raha hai to hum us Verb me “ed” – “d” add kar dete hai taake hum usey base form se past simple ya past participle form me change kar sake.. Agar Verb “y” se end ho raha ho to hum uska last letter jo ke “y” hoga usey “i” mai change karenge aur phir us ke baad “ed” add kardenge.

  • Marry – Married
  • Copy – Copied

Agar hun Gerund use karte hai to hum “ing” add karenge aur isko badalne ke liye hum “to” bhi add karenge.

Aaiye is ka ek example batate hai

Verb “call” uske base form mai “call” hi rahe ga aur “called” ban jayega dono past simple aur participle mai. Isi tarah se ye apply hoga “arrive”, “wait” jaise words ke liye.

Jaaniye Rules of Regular Verbs in Hindi 

Rule – 1

Regular Verbs jo silent “e” mai end hote hai wo “d” ko add karte hai apne simple past aur past participle form mai.

  • Share (Base Form) – Shared (Simple Past) – Shared (Past Participle)
  • Scare (Base Form) – Scared (Simple Past) – Scared (Past Participle)

Rule – 2 

Regular Verbs jo vowel me end hote hai uske baad “-e” aata hai wo “-d” ko add karte hai apne simple past aur past participle form mai.

Ski (Base Form)- Skied (Simple Past) – Skied (Past Participle)

Echo (Base Form)- Echoed (Simple Past) – Echoed (Past Participle)

Rule – 3

Regular Verbs jo “vowel + y” se end hote hai wo add karte hai “ed” apne simple past and past participle form mai.

Play (Base Form) – Played (Simple Past) – Played (Past Participle)

Survey (Base Form) – Surveyed (Simple Past) – Surveyed (Past Participle)

Rule – 4 

Regular Verbs jo end hote hai “Consonant + y” mai, wo change karte hai “y” ko “i” mai aur add karte hai “ed” apne simple past aur past participle form mai. 

Cry (Base Form) – Cried (Simple Past) – Cried (Past Participle)

Try (Base Form) – Tried (Simple Past) – Tried (Past Participle)

Rule – 5

Regular Verbs jo ek stressed vowel ke baad consonant mai end hote hai wo “ed” ko add karne se pehle consonant ko double kardete hai. 

Stop (Base Form) – Stopped (Simple Past) – Stopped (Past Participle)

Ban (Base Form) – Banned (Simple Past) – Banned (Past Participle)

Ab aap samajh gaye honge ke Regular Verbs in Hindi kya hai. Ab aage badhte hai Irregular Verbs in Hindi ki Oar.

Irregular Verbs In Hindi

Irregular Verbs utne easy nahi hote jitne ke Regular Verbs hote hai, overall 200 se zyada Irregular Verbs hai aur aap inko sentence me asaani se set nahi kar sakte jaise ke aap Regular Verbs karte hai. 

Irregular Verbs ka koi pattern nahi hota.

Iske liye hum aapko ek easy tarika batayenge Irregular Verbs ko samajhne ka aur inko apne sentences me use karne ka, toh chaliye dekhte hai wo kya hai.

Hum Irregular Verbs ko jaan sakte hai neeche diye gaye 4 groups ki help se. 

Irregular Verbs ko four groups me divide kiya gaya hai.

  • Group 1 – The Consonant Group
  • Group 2 – The Common Past
  • Group 3 – The Simple Different
  • Group 4 – The Full Mix

The Consonant Group

Consonant Group me wo Verbs aayenge jahan base, past simple aur past participle mai same form hi use hoga. Chaliye example mai “Hurt” word ke bare me dekhte hai.

Base Form –  I have just hurt my leg.

Past Simple –  Yesterday, I hurt my leg.

Past Participle (Passive tense use hoga) – My leg was hurt. (adjective ka use) My hurt leg was painful.

Dusre Verbs jo is Consonant group me fit hote hai wo hai: Let, Cost, Put etc. 

The Common Past

Is group mai jaise ke iska naam bata raha hai, Verbs jo past forms (past simple and past participle) mai use kiye jate hai wo same hi rahenge lekin un ka base form alag hoga. 

Example me “Find” word ke baare me dekhte hai

Base Form – Can you help me find my glasses?

Past Simple – I found my glasses.

Past Participle – My glasses were found.

Ye Irregular Verbs ka bahut bada group hai. Iske kuch aur examples hai:

  • Buy or Bought
  • Feel or Felt
  • Hear or Heard 
  • Keep or Kept
  • Say or Said
  • Sell or Sold etc.

Simply Different  

Is group mai wo Verbs aate hai jahan simple past tense form of word differ karta hai base form and past participle se. Dekhte hai iska example “Run” word ke saath.

Base Form – I love to run (Yahan hum Infinitive version use kar rahe hai) 

Past Simple – He ran to the finish line

Past Participle – His race was run.

Is group mai jo dusre Verbs include honge wo hai:

  • Become or Became
  • Come or Came

The Full Mix 

Ye group sab se easiest group hai. Is ka simple side ye hai ke is ka har form alag hoga. Isse hume confusion nahi hoga base form, past simple aur past participle ke beech mai. Is ka usage depend karega ke hum Verb ka konsa version use kar rahe hai, isse hume pata chal jayega ke ye sentence mai use kis tarah se kiya ja raha hai. Example mai hum “Write” Verb lenge

Base Form – I write with pleasure 

Past Simple – I wrote the letter

Past Participle – The written word is a joy to read.

Dusre Verbs jo is group me aate hai wo ye hai:

  • Be, Was – Were, been 
  • Choose, Chose, Chosen
  • Eat, Ate, Eaten
  • Wake, Woke, Woken
  • Speak, Spoke, Spoken

Ab aap samajh gaye honge ke Irregular Verbs in Hindi kya hai aur ise sentence me kis tarah use kiya jata hai. 

Aaiye Irregular Verb ke aur kuch examples dekhte hai

Begin Began Begun
Do Did Done 
Drive Drove Driven 
FallFellFallen
GiveGave Given
Go Went Gone
Know Knew Known
See Saw Seen
Swim SwamSwum
Take Took Taken

Ab aap jaan gaye honge ke Verbs in Hindi kya hai aur Verbs in Hindi ke forms konse hai aur Verbs types in Hindi konse hai aur kitne hai. Hum ne aapke liye kayi saare examples bhi present kare hai jis se aap Verbs in Hindi me perfect ho sake. Aapko perfect banne ke liye bahut saari practice karni hogi.Toh practice kariye aur Verb me perfect baniye. 

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